दिव्यांगता क्लास8

 दिव्यांगता — कक्षा 8 के लिए संपूर्ण नोट्स



1. दिव्यांगता क्या है?


जब किसी व्यक्ति में लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या इंद्रिय संबंधी कठिनाई हो और उसके कारण उसे समाज में अन्य लोगों के समान कार्य करने या भाग लेने में बाधाओं का सामना करना पड़े, तो इसे दिव्यांगता (Disability) कहा जाता है।


«महत्वपूर्ण: दिव्यांगता व्यक्ति की क्षमता को समाप्त नहीं करती। उचित सहयोग, शिक्षा, तकनीक और अनुकूल वातावरण मिलने पर दिव्यांग व्यक्ति अपनी क्षमताओं का प्रभावी उपयोग कर सकता है।»


भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और समान अवसरों की रक्षा करता है। यह अधिनियम 19 अप्रैल 2017 से लागू हुआ।


---


2. दिव्यांगता के प्रमुख प्रकार


RPwD Act, 2016 में 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताओं का उल्लेख है।


A. शारीरिक दिव्यांगता


इसमें शरीर की गति या शारीरिक कार्यों से संबंधित कठिनाइयाँ शामिल होती हैं।


उदाहरण:


- गतिविषयक दिव्यांगता

- प्रमस्तिष्क घात (Cerebral Palsy)

- बौनापन

- पेशीय दुर्विकास/मस्कुलर डिस्टॉफी

- कुष्ठ रोग से ठीक हुए व्यक्ति

- तेजाबी आक्रमण से प्रभावित व्यक्ति


B. दृष्टि संबंधी दिव्यांगता


आँखों से देखने की क्षमता में गंभीर कमी होने को दृष्टि संबंधी दिव्यांगता कहा जाता है।


मुख्य रूप:


1. अंधता

2. निम्न दृष्टि (Low Vision)


C. श्रवण संबंधी दिव्यांगता


सुनने की क्षमता में गंभीर कमी को श्रवण दिव्यांगता कहते हैं।


मुख्य रूप:


1. बधिरता

2. कम सुनाई देना


D. वाक् एवं भाषा संबंधी दिव्यांगता


बोलने या भाषा को समझने/व्यक्त करने में लंबे समय तक रहने वाली कठिनाई को इस श्रेणी में रखा जाता है।


E. बौद्धिक दिव्यांगता


बौद्धिक कार्यों और दैनिक जीवन में आवश्यक अनुकूलन संबंधी क्षमताओं में महत्वपूर्ण कठिनाई को बौद्धिक दिव्यांगता कहा जाता है।


F. विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता


कुछ बच्चों को पढ़ने, लिखने या गणितीय गणना सीखने में विशेष कठिनाई हो सकती है।


उदाहरण:


- Dyslexia — पढ़ने में कठिनाई

- Dysgraphia — लिखने में कठिनाई

- Dyscalculia — गणितीय गणना में कठिनाई


G. स्वपरायणता स्पेक्ट्रम विकार (Autism Spectrum Disorder)


यह एक विकासात्मक स्थिति है जिसमें सामाजिक संचार और व्यवहार के कुछ क्षेत्रों में विशेषताएँ दिखाई दे सकती हैं।


H. मानसिक बीमारी


कुछ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ व्यक्ति के विचार, व्यवहार, भावनाओं और दैनिक जीवन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती हैं।


I. दीर्घकालिक तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ


इस श्रेणी में कुछ लंबे समय तक रहने वाली तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ आती हैं।


उदाहरण:


- Multiple Sclerosis

- Parkinson's disease


J. रक्त संबंधी विकार


कुछ आनुवंशिक/रक्त संबंधी विकार भी निर्दिष्ट दिव्यांगताओं में शामिल हैं।


उदाहरण:


- Thalassemia

- Hemophilia

- Sickle Cell Disease


K. बहुदिव्यांगता


जब किसी व्यक्ति में एक से अधिक प्रकार की दिव्यांगता एक साथ मौजूद हो, तो उसे बहुदिव्यांगता कहा जाता है।


उदाहरण: दृष्टि और श्रवण दोनों में गंभीर कठिनाई — Deafblindness.


भारत सरकार के अनुसार RPwD Act में कुल 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताएँ शामिल हैं।


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3. दिव्यांगता और बाधा में अंतर


दिव्यांगता व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या इंद्रिय संबंधी स्थिति से जुड़ी हो सकती है।


बाधा (Barrier) वह समस्या है जो व्यक्ति को समाज में समान रूप से भाग लेने से रोकती है।


उदाहरण


यदि कोई विद्यार्थी व्हीलचेयर का उपयोग करता है और विद्यालय में रैंप नहीं है, तो समस्या केवल विद्यार्थी की स्थिति नहीं है; सीढ़ियों वाला अनुपयुक्त वातावरण भी एक बाधा है।


इसलिए विद्यालय और समाज को अधिक सुगम (Accessible) बनाना आवश्यक है।


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4. समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)


जब दिव्यांग और अन्य विद्यार्थी साथ मिलकर सीखते हैं और विद्यालय आवश्यक सहायता उपलब्ध कराता है, तो इसे समावेशी शिक्षा कहा जाता है।


उत्तर प्रदेश की समग्र शिक्षा व्यवस्था में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग और समावेशी विद्यालयों पर जोर दिया जाता है।


समावेशी शिक्षा के लाभ


1. सभी बच्चों को समान अवसर मिलता है।

2. विद्यार्थियों में सहयोग की भावना बढ़ती है।

3. भेदभाव कम होता है।

4. आत्मविश्वास बढ़ता है।

5. समाज में समानता और सम्मान की भावना विकसित होती है।


---


5. हम दिव्यांगजनों की सहायता कैसे कर सकते हैं?


- सम्मानपूर्वक व्यवहार करें।

- बिना पूछे सहायता करने के बजाय पहले पूछें।

- उपहास या भेदभाव न करें।

- विद्यालय में रैंप और सुगम मार्ग जैसी सुविधाओं का समर्थन करें।

- आवश्यकता के अनुसार Braille, audio या अन्य सहायक साधनों का उपयोग किया जा सकता है।

- प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता और स्वतंत्रता का सम्मान करें।


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6. जिज्ञासा आधारित प्रश्न (Curiosity Questions)


प्रश्न 1


यदि किसी विद्यार्थी को दिखाई नहीं देता, तो क्या वह पढ़ाई नहीं कर सकता?


सोचिए: Braille, audio और अन्य सहायक तकनीकों की सहायता से वह कैसे पढ़ सकता है?


प्रश्न 2


यदि किसी विद्यालय में सीढ़ियाँ हैं लेकिन रैंप नहीं है, तो समस्या किसकी है—विद्यार्थी की या विद्यालय की व्यवस्था की?


प्रश्न 3


यदि कोई बच्चा गणित सीखने में सामान्य से अधिक समय लेता है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि वह बुद्धिमान नहीं है?


प्रश्न 4


यदि किसी व्यक्ति को सुनने में कठिनाई है, तो क्या वह खेल, कला या विज्ञान में प्रतिभाशाली नहीं हो सकता?


प्रश्न 5


क्या तकनीक दिव्यांग व्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ा सकती है? अपने उदाहरण दीजिए।


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7. International / Competency-Based Questions


Q1. Situation-Based Question


राहुल व्हीलचेयर का उपयोग करता है। उसके विद्यालय की कक्षा पहली मंजिल पर है और वहाँ जाने के लिए केवल सीढ़ियाँ हैं।


प्रश्न: विद्यालय को क्या करना चाहिए?


A. राहुल को विद्यालय आने से रोकना

B. उसे अलग कक्षा में बैठाना

C. सुगम मार्ग/रैंप या उचित पहुँच की व्यवस्था करना

D. उसे घर पर ही पढ़ाना


उत्तर: C


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Q2. Think and Explain


एक दृष्टिबाधित विद्यार्थी परीक्षा देना चाहता है।


प्रश्न: विद्यालय उसे समान अवसर देने के लिए किन प्रकार की सहायता दे सकता है?


उत्तर: परीक्षा व्यवस्था में उचित सुगम सुविधाएँ और आवश्यक सहायक साधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, ताकि विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार परीक्षा दे सके।


---


Q3. Case Study


एक विद्यालय में सुनने में कठिनाई वाले विद्यार्थी को शिक्षक पढ़ाते हैं। शिक्षक केवल बोलकर पढ़ाते हैं और विद्यार्थी को समझने में कठिनाई होती है।


प्रश्न: शिक्षक अपनी शिक्षण पद्धति में क्या परिवर्तन कर सकते हैं?


उत्तर: लिखित सामग्री, दृश्य सामग्री, संकेत/सहायक संचार और विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार अन्य उपयुक्त साधनों का प्रयोग किया जा सकता है।


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8. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)


1. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम किस वर्ष बना?


A. 1995

B. 2005

C. 2016

D. 2020


उत्तर: C


2. निम्न में से कौन दृष्टि संबंधी दिव्यांगता है?


A. अंधता

B. थैलेसीमिया

C. बौनापन

D. हीमोफीलिया


उत्तर: A


3. Dyslexia मुख्यतः किससे संबंधित है?


A. पढ़ने में कठिनाई

B. सुनने में कठिनाई

C. चलने में कठिनाई

D. देखने में कठिनाई


उत्तर: A


4. Braille मुख्यतः किसके लिए उपयोगी है?


A. श्रवण कठिनाई

B. दृष्टि संबंधी कठिनाई

C. चलने की कठिनाई

D. बोलने की कठिनाई


उत्तर: B


5. दो या अधिक दिव्यांगताओं के एक साथ होने को क्या कहते हैं?


A. एकल दिव्यांगता

B. बहुदिव्यांगता

C. सामान्य अवस्था

D. अस्थायी कठिनाई


उत्तर: B


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9. अति लघु उत्तरीय प्रश्न


1. दिव्यांगता क्या है?

2. समावेशी शिक्षा क्या है?

3. Braille क्या है?

4. Low Vision का अर्थ क्या है?

5. बहुदिव्यांगता किसे कहते हैं?

6. Autism Spectrum Disorder क्या है?

7. Dyslexia किस प्रकार की कठिनाई से संबंधित है?

8. श्रवण दिव्यांगता क्या है?

9. दिव्यांगजनों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?

10. विद्यालय को दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम क्यों बनाया जाना चाहिए?


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10. लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1. समावेशी शिक्षा का महत्व लिखिए।


उत्तर: समावेशी शिक्षा सभी विद्यार्थियों को साथ सीखने का अवसर देती है। इससे समानता, सहयोग, आत्मविश्वास और सामाजिक स्वीकृति बढ़ती है तथा भेदभाव कम होता है।


प्रश्न 2. दिव्यांगजनों के प्रति समाज की क्या जिम्मेदारी है?


उत्तर: समाज को सम्मान, समान अवसर और आवश्यक सहयोग देना चाहिए। भेदभाव और उपहास से बचना चाहिए तथा सार्वजनिक स्थानों और शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुगम बनाना चाहिए।


प्रश्न 3. दिव्यांगता के प्रमुख समूह लिखिए।


उत्तर: शारीरिक, दृष्टि, श्रवण, वाक् एवं भाषा, बौद्धिक, विशिष्ट अधिगम, स्वपरायणता स्पेक्ट्रम, मानसिक बीमारी, तंत्रिका संबंधी, रक्त संबंधी तथा बहुदिव्यांगता आदि।


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11. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न: दिव्यांगता के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।


उत्तर: दिव्यांगता विभिन्न रूपों में हो सकती है। शारीरिक दिव्यांगता में गति संबंधी कठिनाई, cerebral palsy आदि शामिल हो सकते हैं। दृष्टि संबंधी दिव्यांगता में अंधता और निम्न दृष्टि आती है। श्रवण संबंधी दिव्यांगता में बधिरता और कम सुनाई देना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त वाक् एवं भाषा संबंधी दिव्यांगता, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता, autism spectrum disorder, कुछ मानसिक एवं तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ, रक्त संबंधी विकार तथा बहुदिव्यांगता भी RPwD Act में निर्दिष्ट हैं।


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12. याद रखने योग्य बातें


दिव्यांगता ≠ अक्षमता


व्यक्ति की किसी विशेष कठिनाई को देखकर उसकी पूरी क्षमता का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।


Golden Message


“समान अवसर + सम्मान + सहयोग + सुगम वातावरण = समावेशी समाज”


परीक्षा के लिए 5 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु


1. RPwD Act — 2016

2. अधिनियम — 19 अप्रैल 2017 से लागू

3. निर्दिष्ट दिव्यांगताएँ — 21

4. समावेशी शिक्षा — सभी बच्चों को साथ और आवश्यक सहयोग के साथ शिक्षा

5. मुख्य उद्देश्य — समान अधिकार, अवसर, सम्मान और भागीदारी


नोट: ऊपर दी गई 21 दिव्यांगताओं की सूची भारत के RPwD Act, 2016 पर आधारित है। कक्षा 8 के UP Board में प्रश्न पूछे जाने की शैली पाठ्यपुस्तक/विद्यालय के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है; इसलिए इसे परीक्षा-अनुकूल सामान्य अध्ययन नोट्स के रूप में उपयोग करें।

दिव्यांगता — कक्षा 8 के लिए संपूर्ण नोट्स


1. दिव्यांगता क्या है?


जब किसी व्यक्ति में लंबे समय तक रहने वाली शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या इंद्रिय संबंधी कठिनाई हो और उसके कारण उसे समाज में अन्य लोगों के समान कार्य करने या भाग लेने में बाधाओं का सामना करना पड़े, तो इसे दिव्यांगता (Disability) कहा जाता है।


«महत्वपूर्ण: दिव्यांगता व्यक्ति की क्षमता को समाप्त नहीं करती। उचित सहयोग, शिक्षा, तकनीक और अनुकूल वातावरण मिलने पर दिव्यांग व्यक्ति अपनी क्षमताओं का प्रभावी उपयोग कर सकता है।»


भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और समान अवसरों की रक्षा करता है। यह अधिनियम 19 अप्रैल 2017 से लागू हुआ।


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2. दिव्यांगता के प्रमुख प्रकार


RPwD Act, 2016 में 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताओं का उल्लेख है।


A. शारीरिक दिव्यांगता


इसमें शरीर की गति या शारीरिक कार्यों से संबंधित कठिनाइयाँ शामिल होती हैं।


उदाहरण:


- गतिविषयक दिव्यांगता

- प्रमस्तिष्क घात (Cerebral Palsy)

- बौनापन

- पेशीय दुर्विकास/मस्कुलर डिस्टॉफी

- कुष्ठ रोग से ठीक हुए व्यक्ति

- तेजाबी आक्रमण से प्रभावित व्यक्ति


B. दृष्टि संबंधी दिव्यांगता


आँखों से देखने की क्षमता में गंभीर कमी होने को दृष्टि संबंधी दिव्यांगता कहा जाता है।


मुख्य रूप:


1. अंधता

2. निम्न दृष्टि (Low Vision)


C. श्रवण संबंधी दिव्यांगता


सुनने की क्षमता में गंभीर कमी को श्रवण दिव्यांगता कहते हैं।


मुख्य रूप:


1. बधिरता

2. कम सुनाई देना


D. वाक् एवं भाषा संबंधी दिव्यांगता


बोलने या भाषा को समझने/व्यक्त करने में लंबे समय तक रहने वाली कठिनाई को इस श्रेणी में रखा जाता है।


E. बौद्धिक दिव्यांगता


बौद्धिक कार्यों और दैनिक जीवन में आवश्यक अनुकूलन संबंधी क्षमताओं में महत्वपूर्ण कठिनाई को बौद्धिक दिव्यांगता कहा जाता है।


F. विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता


कुछ बच्चों को पढ़ने, लिखने या गणितीय गणना सीखने में विशेष कठिनाई हो सकती है।


उदाहरण:


- Dyslexia — पढ़ने में कठिनाई

- Dysgraphia — लिखने में कठिनाई

- Dyscalculia — गणितीय गणना में कठिनाई


G. स्वपरायणता स्पेक्ट्रम विकार (Autism Spectrum Disorder)


यह एक विकासात्मक स्थिति है जिसमें सामाजिक संचार और व्यवहार के कुछ क्षेत्रों में विशेषताएँ दिखाई दे सकती हैं।


H. मानसिक बीमारी


कुछ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ व्यक्ति के विचार, व्यवहार, भावनाओं और दैनिक जीवन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती हैं।


I. दीर्घकालिक तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ


इस श्रेणी में कुछ लंबे समय तक रहने वाली तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ आती हैं।


उदाहरण:


- Multiple Sclerosis

- Parkinson's disease


J. रक्त संबंधी विकार


कुछ आनुवंशिक/रक्त संबंधी विकार भी निर्दिष्ट दिव्यांगताओं में शामिल हैं।


उदाहरण:


- Thalassemia

- Hemophilia

- Sickle Cell Disease


K. बहुदिव्यांगता


जब किसी व्यक्ति में एक से अधिक प्रकार की दिव्यांगता एक साथ मौजूद हो, तो उसे बहुदिव्यांगता कहा जाता है।


उदाहरण: दृष्टि और श्रवण दोनों में गंभीर कठिनाई — Deafblindness.


भारत सरकार के अनुसार RPwD Act में कुल 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताएँ शामिल हैं।


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3. दिव्यांगता और बाधा में अंतर


दिव्यांगता व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या इंद्रिय संबंधी स्थिति से जुड़ी हो सकती है।


बाधा (Barrier) वह समस्या है जो व्यक्ति को समाज में समान रूप से भाग लेने से रोकती है।


उदाहरण


यदि कोई विद्यार्थी व्हीलचेयर का उपयोग करता है और विद्यालय में रैंप नहीं है, तो समस्या केवल विद्यार्थी की स्थिति नहीं है; सीढ़ियों वाला अनुपयुक्त वातावरण भी एक बाधा है।


इसलिए विद्यालय और समाज को अधिक सुगम (Accessible) बनाना आवश्यक है।


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4. समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)


जब दिव्यांग और अन्य विद्यार्थी साथ मिलकर सीखते हैं और विद्यालय आवश्यक सहायता उपलब्ध कराता है, तो इसे समावेशी शिक्षा कहा जाता है।


उत्तर प्रदेश की समग्र शिक्षा व्यवस्था में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग और समावेशी विद्यालयों पर जोर दिया जाता है।


समावेशी शिक्षा के लाभ


1. सभी बच्चों को समान अवसर मिलता है।

2. विद्यार्थियों में सहयोग की भावना बढ़ती है।

3. भेदभाव कम होता है।

4. आत्मविश्वास बढ़ता है।

5. समाज में समानता और सम्मान की भावना विकसित होती है।


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5. हम दिव्यांगजनों की सहायता कैसे कर सकते हैं?


- सम्मानपूर्वक व्यवहार करें।

- बिना पूछे सहायता करने के बजाय पहले पूछें।

- उपहास या भेदभाव न करें।

- विद्यालय में रैंप और सुगम मार्ग जैसी सुविधाओं का समर्थन करें।

- आवश्यकता के अनुसार Braille, audio या अन्य सहायक साधनों का उपयोग किया जा सकता है।

- प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता और स्वतंत्रता का सम्मान करें।


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6. जिज्ञासा आधारित प्रश्न (Curiosity Questions)


प्रश्न 1


यदि किसी विद्यार्थी को दिखाई नहीं देता, तो क्या वह पढ़ाई नहीं कर सकता?


सोचिए: Braille, audio और अन्य सहायक तकनीकों की सहायता से वह कैसे पढ़ सकता है?


प्रश्न 2


यदि किसी विद्यालय में सीढ़ियाँ हैं लेकिन रैंप नहीं है, तो समस्या किसकी है—विद्यार्थी की या विद्यालय की व्यवस्था की?


प्रश्न 3


यदि कोई बच्चा गणित सीखने में सामान्य से अधिक समय लेता है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि वह बुद्धिमान नहीं है?


प्रश्न 4


यदि किसी व्यक्ति को सुनने में कठिनाई है, तो क्या वह खेल, कला या विज्ञान में प्रतिभाशाली नहीं हो सकता?


प्रश्न 5


क्या तकनीक दिव्यांग व्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ा सकती है? अपने उदाहरण दीजिए।


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7. International / Competency-Based Questions


Q1. Situation-Based Question


राहुल व्हीलचेयर का उपयोग करता है। उसके विद्यालय की कक्षा पहली मंजिल पर है और वहाँ जाने के लिए केवल सीढ़ियाँ हैं।


प्रश्न: विद्यालय को क्या करना चाहिए?


A. राहुल को विद्यालय आने से रोकना

B. उसे अलग कक्षा में बैठाना

C. सुगम मार्ग/रैंप या उचित पहुँच की व्यवस्था करना

D. उसे घर पर ही पढ़ाना


उत्तर: C


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Q2. Think and Explain


एक दृष्टिबाधित विद्यार्थी परीक्षा देना चाहता है।


प्रश्न: विद्यालय उसे समान अवसर देने के लिए किन प्रकार की सहायता दे सकता है?


उत्तर: परीक्षा व्यवस्था में उचित सुगम सुविधाएँ और आवश्यक सहायक साधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, ताकि विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार परीक्षा दे सके।


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Q3. Case Study


एक विद्यालय में सुनने में कठिनाई वाले विद्यार्थी को शिक्षक पढ़ाते हैं। शिक्षक केवल बोलकर पढ़ाते हैं और विद्यार्थी को समझने में कठिनाई होती है।


प्रश्न: शिक्षक अपनी शिक्षण पद्धति में क्या परिवर्तन कर सकते हैं?


उत्तर: लिखित सामग्री, दृश्य सामग्री, संकेत/सहायक संचार और विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार अन्य उपयुक्त साधनों का प्रयोग किया जा सकता है।


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8. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)


1. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम किस वर्ष बना?


A. 1995

B. 2005

C. 2016

D. 2020


उत्तर: C


2. निम्न में से कौन दृष्टि संबंधी दिव्यांगता है?


A. अंधता

B. थैलेसीमिया

C. बौनापन

D. हीमोफीलिया


उत्तर: A


3. Dyslexia मुख्यतः किससे संबंधित है?


A. पढ़ने में कठिनाई

B. सुनने में कठिनाई

C. चलने में कठिनाई

D. देखने में कठिनाई


उत्तर: A


4. Braille मुख्यतः किसके लिए उपयोगी है?


A. श्रवण कठिनाई

B. दृष्टि संबंधी कठिनाई

C. चलने की कठिनाई

D. बोलने की कठिनाई


उत्तर: B


5. दो या अधिक दिव्यांगताओं के एक साथ होने को क्या कहते हैं?


A. एकल दिव्यांगता

B. बहुदिव्यांगता

C. सामान्य अवस्था

D. अस्थायी कठिनाई


उत्तर: B


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9. अति लघु उत्तरीय प्रश्न


1. दिव्यांगता क्या है?

2. समावेशी शिक्षा क्या है?

3. Braille क्या है?

4. Low Vision का अर्थ क्या है?

5. बहुदिव्यांगता किसे कहते हैं?

6. Autism Spectrum Disorder क्या है?

7. Dyslexia किस प्रकार की कठिनाई से संबंधित है?

8. श्रवण दिव्यांगता क्या है?

9. दिव्यांगजनों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?

10. विद्यालय को दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम क्यों बनाया जाना चाहिए?


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10. लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1. समावेशी शिक्षा का महत्व लिखिए।


उत्तर: समावेशी शिक्षा सभी विद्यार्थियों को साथ सीखने का अवसर देती है। इससे समानता, सहयोग, आत्मविश्वास और सामाजिक स्वीकृति बढ़ती है तथा भेदभाव कम होता है।


प्रश्न 2. दिव्यांगजनों के प्रति समाज की क्या जिम्मेदारी है?


उत्तर: समाज को सम्मान, समान अवसर और आवश्यक सहयोग देना चाहिए। भेदभाव और उपहास से बचना चाहिए तथा सार्वजनिक स्थानों और शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुगम बनाना चाहिए।


प्रश्न 3. दिव्यांगता के प्रमुख समूह लिखिए।


उत्तर: शारीरिक, दृष्टि, श्रवण, वाक् एवं भाषा, बौद्धिक, विशिष्ट अधिगम, स्वपरायणता स्पेक्ट्रम, मानसिक बीमारी, तंत्रिका संबंधी, रक्त संबंधी तथा बहुदिव्यांगता आदि।


---अभिषेक बच्चन को बचपन में डिस्लेक्सिया (Dyslexia) नाम की लर्निंग डिसेबिलिटी (सीखने/पढ़ने-लिखने से जुड़ी कठिनाई) थी।

उन्हें लगभग 9 वर्ष की आयु में इसका पता चला था। इस स्थिति में बच्चों को शब्दों को पढ़ने, लिखने और अक्षरों को पहचानने में सामान्य से अधिक परेशानी होती है। आमिर खान की फिल्म ‘तारे ज़मीन पर’ में भी अभिषेक बच्चन का उदाहरण देकर इस स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई थी

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