कार्बन एवं यौगिक8
आधार
डायमंड (हीरा)
ग्रेफाइट
1. संरचना
कार्बन परमाणु त्रिविमीय (3D) जाल बनाते हैं।
कार्बन परमाणु परतदार षट्कोणीय संरचना बनाते हैं।
2. बंधन
प्रत्येक कार्बन परमाणु 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से मजबूत सहसंयोजक बंध बनाता है।
प्रत्येक कार्बन परमाणु 3 अन्य कार्बन परमाणुओं से मजबूत बंध बनाता है; परतों के बीच आकर्षण कमजोर होता है।
3. कठोरता
बहुत कठोर; प्राकृतिक पदार्थों में सबसे कठोर माना जाता है।
अपेक्षाकृत नरम और आसानी से परतों में अलग हो जाता है।
4. विद्युत चालकता
सामान्यतः विद्युत का कुचालक है।
विद्युत का अच्छा चालक है।
5. उपयोग
आभूषण, काँच काटने/ड्रिलिंग जैसे काटने वाले उपकरणों में।
पेंसिल की नोक, इलेक्ट्रोड और स्नेहक के रूप में।
हमारे चारों ओर लगातार कई बदलाव होते रहते हैं, जैसे बर्फ का पिघलना, लोहे में जंग लगना या भोजन का पकना। कक्षा 7 विज्ञान के लिए यह पूरा अध्ययन सामग्री और रचनात्मक अभ्यास सेट नीचे दिया गया है:
rightarrow भौतिक परिवर्तन (क्रिस्टलीकरण)गुण / लक्षणहीरा (Diamond)ग्रेफाइट (Graphite)फुलरीन (Fullerene - C_{60})- संरचना3D चतुष्फलकीय (Tetrahedral) नेटवर्कषट्कोणीय (Hexagonal) परतदार संरचनाफुटबॉल जैसा खोखला गोला (Buckyball)
- कठोरताप्रकृति का सबसे कठोरतम पदार्थमुलायम, चिकना और फिसलने वालामध्यम कठोर
- विद्युत चालकताकुचालक (Bad conductor)सुचालक (Good conductor)अर्धचालक (Semiconductor)
- मुख्य उपयोगआभूषण, कांच व चट्टान काटने मेंपेंसिल लेड, स्नेहक (Lubricant), इलेक्ट्रोड
प्रश्न 1: "पेंसिल की नोक और हीरे की चमक"
स्थिति: रोहन अपनी पेंसिल से लिख रहा था, तभी उसकी नोक टूट गई। उसकी माँ ने बताया कि जिस ग्रेफाइट से पेंसिल बनती है, वह और दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ 'हीरा', दोनों एक ही तत्व (कार्बन) से बने हैं।
प्रश्न: अगर दोनों केवल कार्बन से बने हैं, तो पेंसिल का ग्रेफाइट इतना मुलायम और काला क्यों होता है, जबकि हीरा इतना कठोर और पारदर्शी?
उत्तर:
इसका मुख्य कारण कार्बन परमाणुओं की जुड़ने की व्यवस्था (संरचना) है:
- ग्रेफाइट में: कार्बन परमाणु चपटी परतों (sheets) के रूप में जुड़े होते हैं। ये परतें एक-दूसरे पर आसानी से फिसल सकती हैं, इसलिए ग्रेफाइट नरम और चिकना होता है।
- हीरे में: प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ एक मजबूत 3D (त्रिविमीय) पिंजरे जैसी संरचना बनाता है, जिससे यह अत्यंत कठोर और चमकदार बनता है।
प्रश्न 2: "रसोई का नीला और पीला जादू"
स्थिति: जब गैस स्टोव ठीक से काम करता है, तो बर्तन साफ रहते हैं और नीली लौ निकलती है। लेकिन जब चूल्हा पुराना हो जाता है या लकड़ी जलाई जाती है, तो पीली लौ निकलती है और बर्तनों पर कालिख (कालिमा) जम जाती है।
प्रश्न: दैनिक जीवन में दिखने वाली इस कालिख के पीछे कार्बन का क्या विज्ञान है?
उत्तर:
- नीली लौ (पूर्ण दहन): जब ईंधन (LPG - जो एक हाइड्रोकार्बन है) को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, तो कार्बन पूरी तरह जलकर कार्बन डाइऑक्साइड (\text{CO}_2) और जलवाष्प बनाता है। इसमें कालिख नहीं बनती।
- पीली लौ और कालिख (अपूर्ण दहन): जब ऑक्सीजन कम मिलती है, तो ईंधन का पूरा कार्बन जल नहीं पाता। बचा हुआ अजला कार्बन धुएं और कालिख (Soot) के रूप में बर्तनों की तली पर चिपक जाता है।
प्रश्न 3: "सर्दियों में बंद कमरे की जानलेवा गलती"
स्थिति: अक्सर सर्दियों में चेतावनी दी जाती है कि रात को कमरे की सभी खिड़कियां बंद करके जलती हुई अंगीठी (कोयले की आग) रखकर नहीं सोना चाहिए।
प्रश्न: पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से कोयला जलने पर बंद कमरे में ऐसा क्या होता है जो जानलेवा बन जाता है?
उत्तर:
कोयले में मुख्य रूप से कार्बन होता है।
- बंद कमरे में ताजी हवा (ऑक्सीजन) की कमी हो जाती है।
- अपूर्ण दहन के कारण जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (\text{CO}) गैस बनने लगती है।
- यह गैस गंधहीन और रंगहीन होती है। सांस के जरिए शरीर में जाने पर यह हमारे रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को रोक देती है, जिससे दम घुटने से व्यक्ति की जान जा सकती है।
प्रश्न 4: "प्लास्टिक वरदान भी और पर्यावरण के लिए अभिशाप भी"
स्थिति: हमारी पानी की बोतल, टिफिन बॉक्स और खिलौने सभी प्लास्टिक या पॉलीथिन से बने हैं, जो कार्बन के ही बहुलक (Polymers) हैं।
प्रश्न: क्या कारण है कि कार्बन से बनी सब्जियां या कागज कुछ हफ्तों में मिट्टी में मिल जाते हैं, लेकिन प्लास्टिक सैकड़ों सालों तक पर्यावरण में कचरा बनकर पड़ा रहता है?
उत्तर:
- जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable): फल, सब्जियां और लकड़ी में प्राकृतिक कार्बनिक यौगिक (जैसे सेल्युलोज) होते हैं, जिन्हें मिट्टी के सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया) आसानी से तोड़कर सड़ा देते हैं।
- गैर-जैव-निम्नीकरणीय (Non-biodegradable): प्लास्टिक मानव-निर्मित संश्लेषित कार्बन श्रृंखला (Synthetic Polymers) से बना होता है। इसके रासायनिक बंध इतने मजबूत और अप्राकृतिक होते हैं कि मिट्टी के सूक्ष्मजीव इन्हें विघटित नहीं कर पाते, जिससे यह पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है।
प्रश्न 5: "पौधे और कार्बन का वैश्विक संतुलन"
स्थिति: हम सांस लेते समय कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं और कारखानों व गाड़ियों से भी भारी मात्रा में कार्बन यौगिक हवा में घुलते हैं।
प्रश्न: यदि पेड़-पौधे न हों, तो हमारे वायुमंडल के 'कार्बन चक्र' और पृथ्वी के तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) पर क्या सीधा प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
- पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के दौरान हवा से \text{CO}_2 ग्रहण करके उसे ग्लूकोज और ऑक्सीजन में बदलते हैं।
- \text{CO}_2 एक ग्रीनहाउस गैस है जो सूरज की गर्मी को रोकती है। यदि पेड़ कम होंगे, तो वायुमंडल में \text{CO}_2 की मात्रा तेजी से बढ़ेगी, जिससे पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ेगा (ग्लोबल वॉर्मिंग) और जलवायु परिवर्तन होगा।


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