रेशों से वस्त्र तक क्लास7

 कक्षा 7 विज्ञान | पाठ: रेशों से वस्त्र तक (Fibre to Fabric)



मुख्य अवधारणाएँ (Core Scientific Summary)

  • रेशे (Fibres): वस्त्र निर्माण की मूल इकाई।
    • पादप रेशे: कपास (रूई), पटसन (जूट)।
    • जांतव रेशे (Animal Fibres): जंतुओं से प्राप्त रेशे—ऊन (Wool) एवं रेशम (Silk)। ये दोनों मुख्य रूप से प्रोटीन से बने होते हैं।

1. ऊन प्रदान करने वाले जंतु एवं प्रक्रिया

  • स्रोत: भेड़, बकरी (अंगोरा, कश्मीरी), याक (तिब्बत और लद्दाख), ऊँट, लामा और ऐल्पेका (दक्षिण अमेरिका)।
  • भेड़ की त्वचा पर बाल:
    • दाढ़ी के रूखे बाल।
    • त्वचा के निकट स्थित मुलायम महीन बाल (इन्हीं से ऊन बनती है)।
  • वर्णात्मक प्रजनन (Selective Breeding): अच्छी गुणवत्ता वाले रेशे युक्त संतानों की प्राप्ति के लिए विशेष गुणों वाले जनकों का चयन करना।

ऊन बनाने के क्रमिक चरण:

  1. कटाई (Shearing): भेड़ की त्वचा की सबसे ऊपरी मृत परत के साथ बालों को उतारना (यह प्रक्रिया आमतौर पर गर्मी के मौसम में होती है ताकि भेड़ को ठंड न लगे)।
  2. अभिमार्जन (Scouring): कटी हुई त्वचा और बालों को टंकियों में धोकर धूल, गर्द और चिकनाई निकालना।
  3. छँटाई (Sorting): विभिन्न बनावट वाले रोयों को अलग-अलग करना।
  4. बर की छँटाई (Burr Picking): बालों से छोटे कोमल फूले हुए रेशों (बर) को निकालना।
  5. रंगाई (Dyeing): रेशों को विभिन्न रंगों में रंगना (प्राकृतिक रंग सामान्यतः काला, भूरा या सफेद होता है)।
  6. संसाधन/कताई (Rolling/Spinning): रेशों को सीधा करके लपेटना और धागा बनाना।

2. रेशम कीट का जीवन चक्र एवं रेशम उत्पादन

  • रेशम कीट पालन (Sericulture): रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम के कीटों का पालन-पोषण।
  • जीवन चक्र के चरण: \text{अंडे (Eggs)} \rightarrow \text{लारवा / कैटरपिलर (Caterpillar)} \rightarrow \text{प्यूपा (Pupa/कोकून)} \rightarrow \text{प्रौढ़ कीट (Adult Moth)}
  • कैटरपिलर की कार्यप्रणाली: यह शहतूत (Mulberry) की ताजी पत्तियों को दिन-रात खाकर बड़ा होता है। फिर यह अपने सिर को अंग्रेजी के अंक '8' के रूप में घुमाते हुए प्रोटीनयुक्त तरल स्रावित करता है, जो हवा के संपर्क में आकर कड़ा रेशम का रेशा बन जाता है।
  • कोकून (Cocoon): कैटरपिलर अपने चारों ओर रेशम के रेशों का आवरण बना लेता है, जिसे कोकून कहते हैं।
  • रेशम निष्कर्षण (Reeling): कोकूनों को उबलते पानी में डाला जाता है या भाप में रखा जाता है, जिससे रेशम के रेशे अलग हो जाते हैं। कोकून से रेशे निकालने की प्रक्रिया को रीलिंग (Reeling) कहते हैं।

1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. रेशम कीट पालन का वैज्ञानिक नाम क्या है? (क) एपीकल्चर (ख) सेरीकल्चर (ग) पीसीकल्चर (घ) फ्लोरीकल्चर उत्तर: (ख) सेरीकल्चर

2. जांतव रेशे (ऊन और रेशम) रासायनिक रूप से मुख्यतः क्या होते हैं? (क) कार्बोहाइड्रेट (ख) वसा (ग) प्रोटीन (घ) सेल्युलोज उत्तर: (ग) प्रोटीन

3. ऊन निकालने के लिए बालों की कटाई सामान्यतः किस ऋतु में की जाती है? (क) शीत ऋतु (ख) ग्रीष्म ऋतु (ग) वर्षा ऋतु (घ) कभी भी उत्तर: (ख) ग्रीष्म ऋतु

4. अंगोरा ऊन किस जंतु से प्राप्त की जाती है? (क) अंगोरा बकरी (ख) याक (ग) ऊँट (घ) लामा उत्तर: (क) अंगोरा बकरी

2. रिक्त स्थान एवं सत्य/असत्य

रिक्त स्थान भरें:

  1. शहतूत की पत्तियों को खाकर बढ़ने वाले कीट के लार्वा को कैटरपिलर/रेशम कीट कहते हैं।
  2. कटी हुई ऊन से धूल और चिकनाई हटाने की प्रक्रिया को अभिमार्जन कहते हैं।
  3. ऊन उद्योग में कार्य करने वाले श्रमिक अक्सर एंथ्रैक्स (Anthrax) जीवाणु द्वारा होने वाले 'सॉर्टर्स रोग' से जोखिम में रहते हैं।

सत्य / असत्य:

  1. रेशम का रेशा सेल्युलोज का बना होता है। — (असत्य - यह प्रोटीन है)
  2. भेड़ों के बाल उतारते समय उन्हें असहनीय दर्द होता है। — (असत्य - त्वचा की सबसे ऊपरी परत मृत कोशिकाओं से बनी होती है)
  3. कोकून के भीतर प्यूपा विकसित होकर वयस्क कीट बनता है। — (सत्य)

3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: 'वर्णात्मक प्रजनन' (Selective Breeding) क्या है? इसका क्या महत्व है? उत्तर: उच्च गुणवत्ता और अधिक मात्रा में ऊन देने वाली संतानों की प्राप्ति के लिए विशेष गुणयुक्त जनकों (माता-पिता) का चयन करने की प्रक्रिया को वर्णात्मक प्रजनन कहते हैं। इससे नस्ल सुधरती है और मुलायम पतले बालों वाली भेड़ें प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 2: रेशम के कीट के कोकून को उबलते पानी में क्यों डाला जाता है? उत्तर:

  • कोकून को बांधे रखने वाला प्राकृतिक गोंद (सेरिसिन प्रोटीन) गर्म पानी में पिघलकर ढीला हो जाता है, जिससे रेशम का अविच्छिन्न धागा आसानी से खुल जाता है।
  • इसके अंदर स्थित प्यूपा निष्क्रिय हो जाता है, जिससे वह रेशम के धागे को काटकर बाहर न निकले (अन्यथा धागे के टुकड़े हो जाएंगे)।

प्रश्न 3: व्यावसायिक संकट (Occupational Hazard) के रूप में 'सॉर्टर्स रोग' (Sorter's Disease) क्या है? उत्तर: ऊन उद्योग में काम करने वाले जो श्रमिक छँटाई (Sorting) का कार्य करते हैं, वे कभी-कभी एंथ्रैक्स नामक घातक जीवाणु से संक्रमित हो जाते हैं। यह एक जानलेवा रक्त रोग उत्पन्न करता है, जिसे 'सॉर्टर्स डिजीज' कहते हैं।

4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न: भेड़ के बालों से ऊन का धागा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का चरणबद्ध वैज्ञानिक वर्णन कीजिए। उत्तर: भेड़ के रेशों से स्वेटर बुनने वाली ऊन प्राप्त करने की प्रक्रिया छह प्रमुख चरणों में पूरी होती है:

  1. कटाई (Shearing): भेड़ के शरीर से बालों को पतली मृत त्वचा सहित मशीन या कैंची द्वारा काटा जाता है।
  2. अभिमार्जन (Scouring): कटे बालों को बड़ी टंकियों में साबुन/डिटर्जेंट के घोल में धोया जाता है ताकि पसीना, धूल और प्राकृतिक तेल पूरी तरह निकल जाए।
  3. छँटाई (Sorting): धुले हुए रेशों को कारखानों में उनकी लंबाई, कोमलता और मोटाई के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांटा जाता है।
  4. बर निकालना (Burr Picking): बालों में फंसे छोटे, गोल, रोएँदार रेशों (बर) को छाँटकर अलग किया जाता है और पुनः सुखाया जाता है।
  5. रंगाई (Dyeing): प्राकृतिक रेशा भूरा, काला या सफेद होता है, अतः इसे विभिन्न आकर्षक रंगों में रंगा जाता है।
  6. कताई व लपेटना (Rolling/Spinning): रंगे हुए रेशों को सीधा करके सुलझाया जाता है और रोलर के माध्यम से लपेटकर मजबूत धागे (Yarn) के रूप में तैयार किया जाता है।

5. जिज्ञासा एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न (Curiosity & Science Expert Level Q&A)

प्रश्न 1: जब हम बाल या ऊन जलाते हैं तो पंख जलने जैसी तीखी दुर्गंध आती है, जबकि सूती कपड़ा या कागज जलाने पर ऐसी गंध नहीं आती। इसके पीछे क्या जैव-रासायनिक कारण है? उत्तर: ऊन, रेशम और बाल किरैटिन (Keratin) प्रोटीन से बने होते हैं, जिनमें सल्फर (Sulfur) युक्त अमीनो एसिड (जैसे सिस्टीन) प्रचुर मात्रा में होते हैं। जलने पर सल्फर डाइऑक्साइड व अन्य वाष्पशील यौगिक निकलते हैं, जिससे तीखी विशिष्ट गंध आती है। सूती कपड़ा और कागज सेल्युलोज (कार्बोहाइड्रेट) के बने होते हैं, जिनमें सल्फर नहीं होता; इसलिए वे कागज के जलने जैसी सामान्य गंध देते हैं।

प्रश्न 2: सर्दियों में एक मोटा स्वेटर पहनने की तुलना में उसी मोटाई की दो-तीन पतली परतें (Layers) पहनना अधिक गर्म क्यों रखता है? उत्तर: दो या तीन वस्त्रों की परतों के बीच वायु (Air) की पतली परतें फंस (Trap) जाती हैं। वायु ऊष्मा की कुचालक (Bad Conductor of Heat) है। यह फंसी हुई वायु हमारे शरीर की प्राकृतिक ऊष्मा को बाहर ठंडे वातावरण में जाने से रोक देती है, जिससे बहु-परतीय (Layered) कपड़े अधिक गर्माहट देते हैं।

प्रश्न 3: रेशम का रेशा समान व्यास वाले स्टील के तार से भी अधिक मजबूत माना जाता है, क्यों? उत्तर: रेशम का धागा मुख्य रूप से फाइब्रोइन (Fibroin) प्रोटीन की सघन समानांतर परतों से बना होता है, जो मजबूत हाइड्रोजन बंधों द्वारा आपस में बंधी होती हैं। यह आणविक संरचना इसे उच्च लचीलापन (Flexibility) और अत्यधिक तनन सामर्थ्य (Tensile Strength) प्रदान करती है, जिससे यह खींचने पर आसानी से टूटता नहीं है।

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