जंतुओं एवं पौधे में परिवहन क्लास7

 


जंतुओं एवं पौधों में परिवहन (परिसंचरण) और वातावरण का संबंध

​जीवधारियों में पोषक तत्वों, गैसों (O_2 और CO_2), जल और अपशिष्ट पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया को परिवहन (Transport) कहते हैं। यह प्रणाली सीधे तौर पर बाहरी वातावरण और जलवायु परिस्थितियों से प्रभावित और नियंत्रित होती है।

​संक्षिप्त सारांश (Short Notes)

​1. पौधों में परिवहन एवं वातावरण

  • ​जाइलम (Xylem): जड़ों द्वारा अवशोषित जल और खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाता है।
  • ​फ्लोएम (Phloem): पत्तियों में बने भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है (स्थानांतरण)।
  • ​वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): रंध्रों (Stomata) द्वारा अतिरिक्त जल का वाष्प बनकर उड़ना। यह खिंचाव बल (Suction pull) उत्पन्न कर जल को ऊपर खींचता है।
  • ​वातावरणीय संबंध: उच्च तापमान, तेज हवा और कम आर्द्रता वाष्पोत्सर्जन की दर को बढ़ाते हैं, जिससे स्थानीय वातावरण में नमी और शीतलन (Cooling effect) बना रहता है। मरुस्थलीय पौधे वाष्पोत्सर्जन घटाने के लिए पत्तियों को कांटों में बदल लेते हैं।

​2. जंतुओं में परिवहन एवं वातावरण

  • ​रक्त परिसंचरण तंत्र: रक्त, हृदय और वाहिकाओं द्वारा ऑक्सीजन, पोषक तत्वों और हार्मोन्स का पूरे शरीर में वितरण होता है।
  • ​ताप नियमन (Thermoregulation): रक्त वाहिकाओं का संकुचन (Vasoconstriction) ठंड में शरीर की गर्मी बचाता है और फैलाव (Vasodilation) गर्मी में शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।
  • ​वातावरणीय संबंध: अत्यधिक ऊंचाई (कम ऑक्सीजन) पर शरीर अधिक लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) बनाता है। जलीय जंतुओं में गिल्स और फेफड़े बाहरी माध्यम से गैसों का विनिमय परिवहन तंत्र के साथ मिलकर करते हैं।

​प्रश्न और उत्तर (Q&A: पर्यावरण केंद्रित)

​प्रश्न 1: अत्यधिक गर्म और शुष्क वातावरण में पौधे जल हानि को रोकने के लिए अपनी परिवहन दर को कैसे नियंत्रित करते हैं?

उत्तर: अत्यधिक गर्मी और शुष्कता में पौधे रंध्रों (Stomata) को बंद कर लेते हैं, जिससे वाष्पोत्सर्जन की दर न्यूनतम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, नागफनी जैसे मरुद्भिद (Xerophytic) पौधों में पत्तियाँ कांटों में रूपांतरित हो जाती हैं ताकि जल का अपव्यय न हो।

​प्रश्न 2: ठंडे वातावरण में जंतुओं का रक्त परिसंचरण तंत्र शरीर का तापमान कैसे नियंत्रित करता है?

उत्तर: अत्यधिक ठंड में जंतुओं की त्वचा के निकट स्थित रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं (वासोकंस्ट्रिक्शन)। इससे सतह की ओर रक्त का प्रवाह कम होता है और शरीर की आंतरिक ऊष्मा वातावरण में जाने से बच जाती है।

​प्रश्न 3: वातावरण में नमी (आर्द्रता) बढ़ने पर पौधों में जल परिवहन की गति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: जब वातावरण में आर्द्रता अधिक होती है, तो वाष्पोत्सर्जन की दर घट जाती है। इसके परिणामस्वरूप जाइलम में वाष्पोत्सर्जन खिंचाव कमजोर पड़ता है, जिससे जल और खनिजों के परिवहन की गति धीमी हो जाती है।

​प्रश्न 4: उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में कम वायुमंडलीय दबाव और ऑक्सीजन की कमी का मानव रक्त परिवहन पर क्या असर होता है?

उत्तर: ऊँचाई वाले स्थानों पर ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर में एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) और हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ा देता है ताकि ऊतकों तक ऑक्सीजन का परिवहन सुचारू बना रहे।

​प्रश्न 5: वन और बड़े पैमाने पर वनस्पति स्थानीय वातावरण के तापमान को कम रखने में परिवहन प्रक्रिया के जरिए कैसे मदद करते हैं?

उत्तर: वृक्षों में परिवहन के दौरान होने वाला वाष्पोत्सर्जन वायुमंडल में जलवाष्प छोड़ता है। यह प्रक्रिया आसपास की ऊष्मा को अवशोषित करती है, जिससे वाष्पीकरणीय शीतलन (Evaporative Cooling) होता है और स्थानीय तापमान नियंत्रित रहता है।

बोर्ड परीक्षा (Class 10th / 12th Biology) में पादप परिवहन (Transport in Plants) और वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) से बार-बार पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्नों और उनके सटीक उत्तरों का संकलन:

अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न (1 - 2 अंक)

प्रश्न 1: वाष्पोत्सर्जन को "एक आवश्यक बुराई (Necessary Evil)" क्यों कहा जाता है?

उत्तर:

  • आवश्यक: यह जल और खनिजों को जड़ों से पत्तियों तक खींचने के लिए खिंचाव बल (Suction Pull) बनाता है और तापमान नियंत्रित रखता है।
  • बुराई: पौधे द्वारा अवशोषित कुल जल का लगभग 98-99% भाग इसके द्वारा नष्ट हो जाता है, जिससे अत्यधिक जल हानि का खतरा बना रहता है।

प्रश्न 2: जाइलम और फ्लोएम में परिवहन के मध्य मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

विशेषताजाइलम (Xylem)फ्लोएम (Phloem)
परिवहित पदार्थजल और अकार्बनिक खनिज लवणभोजन (सुक्रोज) एवं अमीनो अम्ल
प्रवाह की दिशाएकदिशीय (नीचे से ऊपर की ओर)द्विदिशीय (स्रोतों से आवश्यकता अनुसार ऊपर-नीचे)
ऊर्जा आवश्यकतामुख्य रूप से भौतिक बलों (भौतिक प्रक्रिया) पर निर्भरपरासरण दाब व ATP (ऊर्जा) की आवश्यकता

दीर्घ उत्तरीय एवं प्रयोगात्मक प्रश्न (3 - 5 अंक)

प्रश्न 3: रंध्रों (Stomata) के खुलने और बंद होने की क्रियाविधि समझाइए। यह वाष्पोत्सर्जन को कैसे नियंत्रित करती है?

उत्तर: रंध्रों का खुलना और बंद होना द्वार कोशिकाओं (Guard Cells) की स्फीति (Turgidity) पर निर्भर करता है:

  1. रंध्र का खुलना: जब जल द्वार कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करता है, तो वे फूल जाती हैं (स्फीत हो जाती हैं)। उनकी बाहरी पतली भित्ति बाहर की ओर खिंचती है, जिससे आंतरिक मोटी भित्ति मुड़कर रंध्र को खोल देती है।
  2. रंध्र का बंद होना: जब द्वार कोशिकाओं से जल बाहर निकल जाता है, तो वे शिथिल (Flaccid) हो जाती हैं और रंध्र बंद हो जाता है।
  • वातावरणीय प्रभाव: दिन के समय प्रकाश की उपस्थिति में रंध्र खुलते हैं जिससे वाष्पोत्सर्जन तेज होता है, जबकि रात में या जल की कमी होने पर रंध्र बंद होकर जल हानि रोकते हैं।

प्रश्न 4: रसारोहण (Ascent of Sap) के "संसंजन-तनाव-वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत" (Cohesion-Tension Theory) को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर: ऊँचे वृक्षों में जल के शिखर तक पहुँचने की व्याख्या डिक्सन एवं जॉली द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत से होती है:

  1. वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (Transpiration Pull): पत्तियों की रंध्रों से जल वाष्प बनकर उड़ता है, जिससे पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में ऋणात्मक दाब उत्पन्न होता है जो जाइलम से जल खींचता है।
  2. संसंजन बल (Cohesion Force): जल के अणुओं के बीच परस्पर आकर्षण बल होता है, जिससे जाइलम वाहिकाओं में जल का एक अटूट स्तंभ बना रहता है।
  3. आसंजन बल (Adhesion Force): जल के अणुओं और जाइलम की लिग्निनयुक्त भित्ति के बीच का आकर्षण जल स्तंभ को टूटने से बचाता है।

प्रश्न 5 (प्रयोगात्मक प्रश्न): "बेल-जार प्रयोग" द्वारा यह कैसे सिद्ध करेंगे कि पौधे वाष्पोत्सर्जन करते हैं?

उत्तर:

  • प्रयोग विधि:
    1. एक स्वस्थ गमले वाले पौधे की मिट्टी को पॉलीथीन शीट से पूरी तरह ढक दें (ताकि मिट्टी से वाष्पीकरण न हो)।
    2. इस गमले को एक काँच के बेल-जार (Bell Jar) से ढककर धूप में रख दें।
    3. नियंत्रण (Control) के लिए बिना पौधे वाला एक खाली गमला भी दूसरे बेल-जार में रखें।
  • प्रेक्षण: कुछ घंटों बाद पौधे वाले बेल-जार की भीतरी दीवारों पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें दिखाई देती हैं, जबकि खाली जार सूखा रहता है।
  • निष्कर्ष: यह सिद्ध करता है कि पौधे के वायवीय भागों (पत्तियों) से जलवाष्प उत्सर्जित होती है

    बोर्ड परीक्षा (Class 10th / 12th Biology) में पादप परिवहन (Transport in Plants) और वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) से बार-बार पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्नों और उनके सटीक उत्तरों का संकलन:

    अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न (1 - 2 अंक)

    प्रश्न 1: वाष्पोत्सर्जन को "एक आवश्यक बुराई (Necessary Evil)" क्यों कहा जाता है?

    उत्तर:

    • आवश्यक: यह जल और खनिजों को जड़ों से पत्तियों तक खींचने के लिए खिंचाव बल (Suction Pull) बनाता है और तापमान नियंत्रित रखता है।
    • बुराई: पौधे द्वारा अवशोषित कुल जल का लगभग 98-99% भाग इसके द्वारा नष्ट हो जाता है, जिससे अत्यधिक जल हानि का खतरा बना रहता है।

    प्रश्न 2: जाइलम और फ्लोएम में परिवहन के मध्य मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर:

    विशेषताजाइलम (Xylem)फ्लोएम (Phloem)
    परिवहित पदार्थजल और अकार्बनिक खनिज लवणभोजन (सुक्रोज) एवं अमीनो अम्ल
    प्रवाह की दिशाएकदिशीय (नीचे से ऊपर की ओर)द्विदिशीय (स्रोतों से आवश्यकता अनुसार ऊपर-नीचे)
    ऊर्जा आवश्यकतामुख्य रूप से भौतिक बलों (भौतिक प्रक्रिया) पर निर्भरपरासरण दाब व ATP (ऊर्जा) की आवश्यकता

    दीर्घ उत्तरीय एवं प्रयोगात्मक प्रश्न (3 - 5 अंक)

    प्रश्न 3: रंध्रों (Stomata) के खुलने और बंद होने की क्रियाविधि समझाइए। यह वाष्पोत्सर्जन को कैसे नियंत्रित करती है?

    उत्तर: रंध्रों का खुलना और बंद होना द्वार कोशिकाओं (Guard Cells) की स्फीति (Turgidity) पर निर्भर करता है:

    1. रंध्र का खुलना: जब जल द्वार कोशिकाओं के भीतर प्रवेश करता है, तो वे फूल जाती हैं (स्फीत हो जाती हैं)। उनकी बाहरी पतली भित्ति बाहर की ओर खिंचती है, जिससे आंतरिक मोटी भित्ति मुड़कर रंध्र को खोल देती है।
    2. रंध्र का बंद होना: जब द्वार कोशिकाओं से जल बाहर निकल जाता है, तो वे शिथिल (Flaccid) हो जाती हैं और रंध्र बंद हो जाता है।
    • वातावरणीय प्रभाव: दिन के समय प्रकाश की उपस्थिति में रंध्र खुलते हैं जिससे वाष्पोत्सर्जन तेज होता है, जबकि रात में या जल की कमी होने पर रंध्र बंद होकर जल हानि रोकते हैं।

    प्रश्न 4: रसारोहण (Ascent of Sap) के "संसंजन-तनाव-वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धांत" (Cohesion-Tension Theory) को संक्षेप में लिखिए।

    उत्तर: ऊँचे वृक्षों में जल के शिखर तक पहुँचने की व्याख्या डिक्सन एवं जॉली द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत से होती है:

    1. वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (Transpiration Pull): पत्तियों की रंध्रों से जल वाष्प बनकर उड़ता है, जिससे पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में ऋणात्मक दाब उत्पन्न होता है जो जाइलम से जल खींचता है।
    2. संसंजन बल (Cohesion Force): जल के अणुओं के बीच परस्पर आकर्षण बल होता है, जिससे जाइलम वाहिकाओं में जल का एक अटूट स्तंभ बना रहता है।
    3. आसंजन बल (Adhesion Force): जल के अणुओं और जाइलम की लिग्निनयुक्त भित्ति के बीच का आकर्षण जल स्तंभ को टूटने से बचाता है।

    प्रश्न 5 (प्रयोगात्मक प्रश्न): "बेल-जार प्रयोग" द्वारा यह कैसे सिद्ध करेंगे कि पौधे वाष्पोत्सर्जन करते हैं?

    उत्तर:

    • प्रयोग विधि:
      1. एक स्वस्थ गमले वाले पौधे की मिट्टी को पॉलीथीन शीट से पूरी तरह ढक दें (ताकि मिट्टी से वाष्पीकरण न हो)।
      2. इस गमले को एक काँच के बेल-जार (Bell Jar) से ढककर धूप में रख दें।
      3. नियंत्रण (Control) के लिए बिना पौधे वाला एक खाली गमला भी दूसरे बेल-जार में रखें।
    • प्रेक्षण: कुछ घंटों बाद पौधे वाले बेल-जार की भीतरी दीवारों पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें दिखाई देती हैं, जबकि खाली जार सूखा रहता है।
    • निष्कर्ष: यह सिद्ध करता है कि पौधे के वायवीय भागों (पत्तियों) से जलवाष्प उत्सर्जित होती है।


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